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हिंदी में........कुछ अपनी बात

मरे हुए लोग

कोई पीड़ा नहीं कोई अपेक्षा नहीं जो जैसा है जहां है, सब सही ढल जाते हैं जैसी भी हो स्थिति परिस्थिति जब सवाल ही नहीं फिर जवाब की फ़िक्र कैसी सुबह उठ जीने की कोशिश में काम पर जाते हैं रोटी कमाने की जद्दोजहद के बीच साफ़ पानी – हवा का स्वाद भी भूल जाते […]

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दवा – खाना

मन ही मन सोचने लगा काश केवल दवा से ही मुन्ना ठीक हो जाता !

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कहानी - किस्सों की बातें shubha’s stories Teacher’s Diary

छोटी सी ग़लती…

लड़का रोआंसा हो गया “अंकल क्या मेरे कारण मछलियाँ मर गयी?” दुकान वाले ने कहा “नहीं बेटे मछलियाँ तो कई कारणों से मर जातीं है कभी मौसम या कोई बीमारी” इस बार अधिक दाने डाल देना भी एक छोटी सी ग़लती थी लेकिन अगर आप समय पर बता देते तो हम इसे सम्हाल भी सकते थे ।

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बिका हुआ आदमी

बाज़ार ही लगा लेता है अब मोल इंसान का
सालाना आमदनी से लगती हो क़ीमत जिसकी
किसी को क्या ख़रीदेगा वो
ख़ुद बिका हुआ आदमी….