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हिंदी में........कुछ अपनी बात

कभी यूँ भी……पूरा हुआ सफ़र

कभी यूँ भी लगता है, कि मुहब्बत किससे है मुझे क्यों तुम्हारी आँखो में अपनी ही पहचान ढूँढती हुँ रंगत बदल जाती है चेहरे की, ज़िक्र आते ही तेरा, सच है मगर ज़ाहिर ना हो जाए कहीं, कि हवा का रुख़ मोड़ देती हुँ यूँ ही मुस्कुराना बेसबब….अच्छा नहीं, कि देख ले कोई राज़दारी यूँ […]