उठो!! विद्रोहिणी बनो

💐💐💐💐💐💐💐 उठो आगे बढ़ो आसमान कोई टूटा नहीं है बलात्कार है बस एक दुर्घटना दिखाती जो एक नीच की नपुंसकता लज्जा का आभूषण जो बेड़ियाँ बने उतार फेंको हर उस आवरण को याद रखो प्रकृति में सब कुछ नग्न ही है फिर तुम ख़ुद की नग्नता से ना डरो हुंकार भरो और नाश करो ।।Continue reading “उठो!! विद्रोहिणी बनो”

छोटी सी ग़लती…

लड़का रोआंसा हो गया “अंकल क्या मेरे कारण मछलियाँ मर गयी?” दुकान वाले ने कहा “नहीं बेटे मछलियाँ तो कई कारणों से मर जातीं है कभी मौसम या कोई बीमारी” इस बार अधिक दाने डाल देना भी एक छोटी सी ग़लती थी लेकिन अगर आप समय पर बता देते तो हम इसे सम्हाल भी सकते थे ।

ख़ूब बिक रहा सामान अक़्लों – होशियारी मापने का, इंसानों की बस्ती में आजकल जो कहीं मिल जाए चश्मा नीयत पहचानने का चश्मा तो ज़रा हमें भी ख़बर करना शुभा