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हिंदी में........कुछ अपनी बात

ध्यान दो….मम्मा

‘अरे बेटा ज़रा ध्यान तो दो इधर..,मैं कुछ समझा रही हूँ और तुम हो कि… .. “तुम सुनो मम्मा….मुझे कोई advice नही चाहिए‘ – बेटे ने तपाक से कहा (जैसे ही मैंने उसे समझाने की कोशिश की ।वो किसी बात से परेशान था, शायद ख़ुद से ही….) वो कहता ही जा रहा था – ‘तुम […]

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हिंदी में........कुछ अपनी बात

सब ठीक है

पहली – यार सुबह से इतनी शुभकामनाएँ आ रही है, ख़ास अच्छा तो कुछ ख़ास हुआ नही । दूसरी – हाँ यार, हर साल यही हाल। सब वैसा ही रहता है। तीसरा कोई – शुभकामनाएँ क्या सबको मिली? सब वैसा ही रहे, ठीक रहे, ये अच्छा नहीं हैं क्या? “ठीक” होना भी अच्छा है । […]

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हिंदी में........कुछ अपनी बात

गुजर गया एक साल और

शुभा

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हिंदी में........कुछ अपनी बात

“नादान थे तब, जब शुरू किया चलते रहे ख़्वाबो की ख़ातिर मुकम्मल सा मग़र कुछ ना मिला आख़िर-शै ने ज़ाहिर सा किया, बड़ा बेशउर सा गुज़रा सफ़र ज़िंदगी का”

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हिंदी में........कुछ अपनी बात

कुछ तो बात है….

खूबसूरत लगे किसी हद तक या कि सूरत ही ना पसंद आए देख कर मिलना चाहे कोई या कि कतरा के निकल जाए दो पल साथ गुज़ारने की ख्वाहिश में एक प्याली चाय का इसरार हो ना हो ज़रूरत भी महसूस न हो शायद कभी कोई ऐसा लम्हा आ जाए लेकिन अनदेखा कर दे तुझे, […]