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एक कविता – दर्पण

दर्पण सुंदर दिखता इसमें छिपा माधुर्य कहीं तो कभी पीड़ा की भी छाप दिखी वीर कोई ललकारता, पुकारता हुंकारता सा या कोमल करुणा की प्रतीति कहीं है ख़ुशबू हँसी ख़ुशी की तो कभी चीतकारता रुदन है आइना है ये एक, धुँधला ही सही भावनाओं की है श्रद्धांजली सी कहानी, कविता, गीत हो या कथा कोई […]