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हिंदी में........कुछ अपनी बात

सिर्फ़ प्रश्न हैं पास मेरे

जाने कितनों की साँस टूटेगी और कितनों की आस ये क़हर कब तक इस क़दर बरसेगा कि इन्सान ख़ुश होने से डरेगा डर लगता है अब दोस्तों का हालचाल पूछने में जाने किस ओर से जवाब में खामोशी आ जाए क्या होगा उन नन्ही उम्मीदों का जो बिन माँ बाप बिखर जाएँगी क्या होगा उन […]

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हिंदी में........कुछ अपनी बात

मरे हुए लोग

कोई पीड़ा नहीं कोई अपेक्षा नहीं जो जैसा है जहां है, सब सही ढल जाते हैं जैसी भी हो स्थिति परिस्थिति जब सवाल ही नहीं फिर जवाब की फ़िक्र कैसी सुबह उठ जीने की कोशिश में काम पर जाते हैं रोटी कमाने की जद्दोजहद के बीच साफ़ पानी – हवा का स्वाद भी भूल जाते […]

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हिंदी में........कुछ अपनी बात

कभी यूँ भी……पूरा हुआ सफ़र

कभी यूँ भी लगता है, कि मुहब्बत किससे है मुझे क्यों तुम्हारी आँखो में अपनी ही पहचान ढूँढती हुँ रंगत बदल जाती है चेहरे की, ज़िक्र आते ही तेरा, सच है मगर ज़ाहिर ना हो जाए कहीं, कि हवा का रुख़ मोड़ देती हुँ यूँ ही मुस्कुराना बेसबब….अच्छा नहीं, कि देख ले कोई राज़दारी यूँ […]

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यूँ ही कभी…

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हिंदी में........कुछ अपनी बात

बेरुख़ी तेरी