छोटी सी ग़लती…

लड़का रोआंसा हो गया “अंकल क्या मेरे कारण मछलियाँ मर गयी?” दुकान वाले ने कहा “नहीं बेटे मछलियाँ तो कई कारणों से मर जातीं है कभी मौसम या कोई बीमारी” इस बार अधिक दाने डाल देना भी एक छोटी सी ग़लती थी लेकिन अगर आप समय पर बता देते तो हम इसे सम्हाल भी सकते थे ।

क्या चाहती है हम से ज़िन्दगी…?

“ऋत्विका ने ऐसा क्यूँ किया समझ नहीं पा रहा हुँ, लेकिन पिछले कुछ दिनों से उसका रूटीन बदला सा था और चिढ़ भी अधिक हो गयी थी उसकी। क्या करूँ कुछ समझ नहीं आ रहा….” (मेरे पास भी कहाँ कोई उत्तर था कि ऐसे समय में क्या किया जाए। हम तो धमकाने चमकाने या उपदेश देने का ही तरीक़ा जानते हैं। और इनको तो शायद वास्तविक स्थिति का अंदाज़ा भी नहीं)

क्या तुम मेरे साथ एक सपना देखोगे……?

उन दिनों जब हम कॉलेज में पढ़ते थे, जब एक तिपहिया टेम्पो हमारा आने जाने का साधन होता था और बिना कैंटीन के कॉलेज में टिफ़िन ले कर जाते और शाम होते घर आ जाते, उन दिनों हमारे टेम्पो स्टैंड पर किनारे की चाय दुकान पर एक छोटा सा लड़का अपने पापा का हाथ बँटाताContinue reading “क्या तुम मेरे साथ एक सपना देखोगे……?”