भ्रम

थक कर, राह में रुक कर देखा जो आसपास विरक्त मन और क्लांत है तन, अंधकार का नही कोई छोर भीतर बाहर कालिमा में घुलती गंध जलते लहू की सहना मुश्किल रहना मुश्किल, कुछ भी लेकिन कहना मुश्किल औक़ात क्या मेरी क्या तेरी, बस रोटी – पानी की है दौड़ चलते रहने की क़ीमत पर,Continue reading “भ्रम”

जलती सिसकियाँ

आज जो तुम मौन खड़े हो सब जानते हुए कल तुम भी पर बीतेगी, तब मत रोना अनदेखा कर रहे हो आज उसकी बेबसी कल बेड़ियाँ फटें तुम्हारे पाँव तो मत रोना वक़्त पूछेगा हिसाब, हर उस लम्हे का जब मूक दर्शक बने, क़िस्सा सुन रहे थे उसके लुटने का जो जलती रही चितायें यूँContinue reading “जलती सिसकियाँ”

उठो!! विद्रोहिणी बनो

💐💐💐💐💐💐💐 उठो आगे बढ़ो आसमान कोई टूटा नहीं है बलात्कार है बस एक दुर्घटना दिखाती जो एक नीच की नपुंसकता लज्जा का आभूषण जो बेड़ियाँ बने उतार फेंको हर उस आवरण को याद रखो प्रकृति में सब कुछ नग्न ही है फिर तुम ख़ुद की नग्नता से ना डरो हुंकार भरो और नाश करो ।।Continue reading “उठो!! विद्रोहिणी बनो”

घोंसले की चिड़िया

घर के पास वो एक पेड़ जिस में हर साल घोंसले बनाती है चिड़ियाँ नर्म पंखों से रोकती है धूप और बारिश कि उन नन्ही चहचहाटों को सहमा ना दे हवा जतन से सहेजती है, सम्भालती है अपनी दुनिया जानती है कि उड़ जाएँगे ये एक दिन नन्हे चूज़ों के बड़े मज़बूत पंखों और ऊँचीContinue reading “घोंसले की चिड़िया”